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IPO से जुड़े बिंदुओं को समझने के लिए अब आपको नहीं होना होगा परेशान

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दुनियाभर में कोई भी कंपनी जब अपने काम को बढ़ाने के क्रम को शुरू करती है, तो वो पहला कदम ‘IPO’  के रूप में उठाती है और इस तरह IPO किसी भी कंपनी के पब्लिक होने तक के सफर का एक अहम हिस्सा बन जाता है।    

या यूं कहें – आईपीओ, कंपनी के बढ़ने की सबसे पहली वो सीढ़ी है, जो कंपनी के नींव को मजबूत करती है

हममें से काफी लोग आईपीओ के जरिए स्टॉक मार्केट के इस प्रक्रिया में शामिल होना चाहते हैं। अगर आप किसी कंपनी के आईपीओ में इनवेस्ट करने के लिए सोच रहे हैं या फिर इनवेस्टमेंट करने जा रहे हैं, तो आपको आईपीओ से जुड़े कुछ बिंदुओं को जानना बहुत जरूरी हो जाता है।

आईपीओ से जुड़े कुछ जरूरी बिंदु इस तरह से हैं..

  1. IPO Prospectus –
    IPO prospectus में कंपनी की सभी जरूरी जानकारी के बारे में लिखा रहता है। इसे कंपनी और इनवेस्टमेंट बैंकर्स मिलकर तैयार करते है। इसमें कंपनी की संभावनाएं, रिस्क और फायनेंस(Finance) से जुड़ी सभी जानकारियां होती हैं। इसको पढ़कर आप कंपनी और उसके आईपीओ के बारे में अनुमान लगा सकते हैं।

दरअसल कंपनी और इनवेस्टमेंट बैंक मिलकर एक RHP- red herring prospectus तैयार करके मार्केट रेगुलेटर सेबी(SEBI) को उपलब्ध कराती है। इसी red herring prospectus को IPO Prospectus कहते हैं। ये prospectus सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है और आप इसे www.sebi.gov.in वेबसाइट से देख सकते हैं।

  1. Bid lot/Market lot-
    ये आईपीओ के लिए कंपनी की तरफ से एक निर्धारित शेयर्स की संख्या (fixed share price) होती हैं और आप इसी निर्धारित शेयर्स की संख्या में या फिर उसके गुने के शेयर्स में आईपीओ में बोली लगा सकते हैं।

उदाहरण- अभी Wilson & solar company का IPO आया था, जिसका Market lot -19 था। यानि आप इस कंपनी के 19 शेयर्स की बोली लगा सकते हैं या फिर 19 के गुणे के शेयर्स में बोली लगा सकते हैं।

  1. Fixed Price & Book Building (Price band) Issue –

आईपीओ का दाम दो तरह से निर्धारित किया जाता है- fixed price & book building price.

जब आईपीओ का इश्यू प्राइस(issue price) निर्धारित कर दिया जाता है तो वो Fixed price issue होता है । जैसे- किसी कंपनी के आईपीओ का फिक्स प्राइस - 200 रु. प्रति शेयर रख दिया गया हो। वहीं जब IPO का दाम एक बैंड में इश्यू होता है, तब वो book building price होता है।

जैसे-किसी कंपनी का book building price- (220-250) रु. प्रति शेयर हो, तो ये प्राइस बैंड हो जाएगी। इसमें एक निर्धारित प्राइस के बजाय प्राइस का एक बैंड (band) बनाया जाता है उसी बैंड के बीच आईपीओ का दाम रहता है। इसमें अधिकतम और न्यूनतम दाम का निर्धारण भी होता है। वैसे  ज्यादातर कंपनियों के आईपीओ का इश्यू प्राइस(issue price) - book building ही होती है।

4.Issue Size-
कंपनी अपने आईपीओ से जितने फंड को उठाने की उम्मीद करती है, वही issue size कहलाता है। अगर कोई कंपनी कह रही है उसके IPO का Issue size- 500 cr  है, तो इसका मतलब ये हुआ कि वो कंपनी IPO के जरिए 500 करोड़ उठाने की उम्मीद कर रही है।

5.Cut Off Price & Floor Price-
आईपीओ को खरीदते समय इन दो बिंदुओं को देखकर हम सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर इनका मतलब क्या है?

तो चलिए सबसे आसान तरीके से बताते हैं- Cut off price एक तरह से IPO के आखिरी प्रक्रिया यानि Allotment के दौरान का IPO price होता है,वहीं floor price बोली के वक्त का सबसे कम दाम (rate) होता है। 

  1. Over Subscription-
    आईपीओ के लिए जितने शेयर्स कंपनी इश्यू (issue) कर रही है और उस आईपीओ में शेयर्स से ज्यादा उसकी बोली लग जाएं, तो इसे oversubscription कहते हैं।

उदा-  किसी कंपनी ने 3000 शेयर्स इश्यू किए और उन कंपनी के शेयर्स की बोली -9000 शेयर्स के बराबर आ जाती है, तो इसका मतलब ये हुआ कि उस कंपनी का आईपीओ 3 गुना oversubscribe हुआ है।

  1. Shares Allotment-
    आईपीओ में लगाई गई बोली के हिसाब से जब हमें शेयर्स मिलता है, तो उसे shares allotment कहते हैं। IPO के शेयर्स जितना ज्यादा oversubscribe होगें, उतना ही ज्यादा हमारे शेयर्स के allotment के मौके कम होगें। दरअसल Allotment इस सूत्र पर काम करता है- shares applied/ oversubscribed

उदाहरण- अगर आपने 1000 शेयर्स की बोली लगाई है और वो कंपनी 2 गुना oversubscribe हो गई है तो आपको 500 शेयर्स ही मिलेगें।

वैसे शेयर्स के allotment के बाद 7 दिनों तक में कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट हो जाती है।

इन कुछ बिंदुओं को जानना हमारे लिए बेहद जरूरी हो जाता है। आईपीओ से जुड़ी ऐसी ही और जानकारियों के लिए आप www.finnovationz.com को  देख सकते हैं। 

Learn how to read IPO report

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